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 मोह्बत और नफरत दोनों तराजू का दो पलड़ा हैं.... हम जब साथ होते है तो मोह्बत का पलड़ा भारी होता हैं और जब बिछड़ जाते है तो नफरत का...
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 कुछ जख्म होते है जो दिखते नहीं पर उसका दर्द रूह को भी रुला देती है..                                                           Lalit....
सोचता रहा ये रातभर करवट बदल बदल कर, जानें वो क्यों बदल गया, मुझको इतना बदल कर।

शिखा शर्मा

तेरा इश्क़ झूठा था डूब कर इश्क़ के समन्दर में गोता खाकर निकल गया तेरा इश्क़ झूठा था वादे करके मुकर गया इश्क़ क्या है तूने ही मुझे बताया था दिन में बेचैनी और रातों में जगाया था मेरा लहू पीकर तेरा तो रूप-रूप निखर गया तेरा इश्क़ झूठा था वादे करके मुकर गया बेवफाई की फुंहकार से तूने इतना ज़हर उगल दिया घूंट पी-पीकर मेरा बदन नीला पड़ गया इश्क़ के सपनों का वो हर मीठा लम्हा गुजर गया तेरा इश्क़ झूठा था वादे करके मुकर गया बात किए बगैर तब नहीं होती थी रात कसमें खाई कितनी नहीं छोड़ूगा तेरा साथ मेरी पाक मोहब्बत से अब तू कितना बिफर गया तेरा इश्क़ झूठा था वादे करके मुकर गया तू अब भी नहीं कहता कि मैं बेवफा हूँ तेरे साथ हर घड़ी हर दफा हूँ लौटा सके तो लौटा दे जो मेरा सब कुछ बिखर गया तेरा इश्क़ झूठा था वादे करके मुकर गया
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
तुम हँसते हो मुझे हँसाने के लिए, तुम रोते हो तो मुझे रुलाने के लिए, तुम एक बार रूठ कर तो देखो, मर जायेंगे तुम्हें मनाने के लिए। आज मैंने खुद से एक वादा किया है, माफ़ी मांगूंगा तुझसे तुझे रुसवा किया है, हर मोड़ पर रहूँगा मैं तेरे साथ साथ, अनजाने में मैंने तुझको बहुत दर्द दिया है। धड़कन बनके जो दिल में समा गए हैं, हर एक पल उनकी याद में बिताते हैं, आंसू निकल आये जब वो याद आ गए, जान निकल जाती है जब वो रूठ जाते हैं। तुम खफा हो गए तो कोई ख़ुशी न रहेगी, तुम्हारे बिना चिरागों में रौशनी न रहेगी, क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर ऐ दोस्त, जिंदा तो रहेंगे लेकिन ज़िंदगी न रहेगी। दर्द गैरों को सुनाने की ज़रूरत क्या है, अपने साथ औरों को रुलाने की ज़रूरत क्या है, वक्त यूँही कम है मोहब्बत के लिए, रूठकर वक्त गंवाने की ज़रूरत क्या है।
कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं, मुझे सताने के सलीके... तो उन्हें बेहिसाब आते हैं… बहुत ही याद आता है मेरे दिल को तड़पाता है, वो तेरा पास न होना मुझ को बहुत रुलाता है। वो क्या जाने, यादों की कीमत, जो ख़ुद यादों को मिटा दिया करते हैं, यादो का मतलब तो उनसे पूछो जो, यादों के सहारे जिया करते हैं। सुनो तुम अपनी यादो को समझा लो जरा मुझे तंग करती हैं एक कर्जदार की तरह।