उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए
अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
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