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नज़रे करम मुझ पर इतना न कर,
की तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं,
मुझे इतना न पिला इश्क़-ए-जाम की,
मैं इश्क़ के जहर का आदि हो जाऊं।

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मेरा उसको चाहना सबसे बड़ी भूल थी................. प्यार तो मेरा ऐसा था यार कि हर हाल में वो मुझे कबूल थी..................
तेरी हर हकीकत जानते हुए भी मैंने तुझे चाहा था .............. क्या कमी हुआ मेरे इश्क में जो तुझे तो बस जाना था................
कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता, तुम न होते न सही... ज़िक्र तुम्हारा होता।